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NEWS ANALYSIS

World Health Organization financing/ विश्व स्वास्थ्य संगठन का वित्तीयन-

हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि वह डब्ल्यूएचओ को अमेरिका द्वारा दी जाने वाली धनराशि को रोक देगा, अमेरिका ने यह आरोप लगाया कि कोरोना के प्रसार को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बेहतर प्रबंधित नहीं किया

WHO के वित्तीयन के सम्बंध में निम्नलिखित व्यवस्था है

  • यह बड़ी संख्या में देशों, परोपकारी संगठनों, संयुक्त राष्ट्र संगठनों आदि द्वारा वित्त पोषित है। डब्ल्यूएचओ द्वारा अपलोड की गई जानकारी के अनुसार, सदस्य राज्यों (जैसे अमेरिका) से स्वैच्छिक दान 35.41% योगदान करते हैं, मूल्यांकन योगदान 15.6%% है, परोपकारी संगठन खाते से 9.33% , संयुक्त राष्ट्र के संगठन लगभग 8.1% का योगदान करते हैं; शेष विभिन्न स्रोतों से आता है।
  • अमेरिका WHO की कुल फंडिंग का लगभग 15% और सदस्य राज्यों के वित्तीयन का लगभग 31% योगदान देता है, दोनों मामलों में सबसे बड़ा हिस्सा है।
  • भारत सदस्य देशों के दान का 1% योगदान देता है (जो कि कुल WHO फंडिंग का .48% है)।
  • डब्ल्यूएचओ के कुल वित्तीय बजट का 5 प्रतिशत से अधिक योगदान अमेरिका के बाद यूके (7.79 प्रतिशत) और जर्मनी (5.68 प्रतिशत) द्वारा आता है ।
  • मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNOCHA) 5 प्रतिशत से अधिक योगदान देने वाला अन्य निकाय है।
  • विश्व बैंक (3.42 प्रतिशत), रोटरी इंटरनेशनल (3.3 प्रतिशत), यूरोपीय आयोग (3.3 प्रतिशत) और जापान (2.7 प्रतिशत) डब्ल्यूएचओ के वित्त के अन्य प्रमुख योगदानकर्ताओं में से हैं।
  • डब्ल्यूएचओ के लिए, इसके कुल वित्त पोषण का लगभग 15% का नुकसान दुनिया भर में असर पड़ता है। हालाँकि, जब तक अन्य देश अमेरिका के समान कार्य नहीं करेंगे, तब तक इस कदम से डब्ल्यूएचओ के संचालन में गंभीर बाधा नहीं आ सकती है।
  • चीन, जो नॉवल कोरोनोवायरस महामारी के मद्देनजर मौजूदा डब्ल्यूएचओ विवाद के केंद्र में है, वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी में कुल धन का केवल 0.21 प्रतिशत प्रवाहित करता है।
  • वित्त पोषण की अगली बड़ी श्रेणी में जो मूल्यांकन योगदान किया जाता है वह सदस्यता शुल्क की तरह हैं।एक सदस्य के रूप में कोई भी राष्ट्र इस सदस्यता शुल्क से मुक्त नहीं रहा सकता
  • डब्ल्यूएचओ प्रत्येक सदस्य देश के लिए उसके वित्तीय स्वास्थ्य और जनसंख्या के आधार पर निर्धारित शुल्क का आकलन करता है। इसी कारण से, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, यूएस, कुल WHO फंडों में लगभग 15 प्रतिशत का योगदान देती है और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था 0.25 प्रतिशत से कम योगदान करती है ।
  • स्वास्थ फ़्लू महामारी के विश्व में प्रसारित होने के दो साल बाद, 2011 में स्वास्थ्य एजेंसी की कुल धनराशि के 17 प्रतिशत के लिए मूल्यांकन योगदान या डब्ल्यूएचओ सदस्यता शुल्क से आता है।

WHO का व्यय: –

  • विश्व स्वास्थय संगठन विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होता है। उदाहरण के लिए, 2018-19 में, 19.36% (लगभग $ 1 बीएन) पोलियो उन्मूलन पर खर्च किया गया था, आवश्यक स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं की बढ़ती पहुंच पर 8.77%, टीका निवारणीय रोगों पर 7% और प्रकोपों की रोकथाम और नियंत्रण पर लगभग 4.36% खर्च किया गया था।
  • अफ्रीका के देशों को डब्ल्यूएचओ परियोजनाओं के लिए $ 1.6 बिलियन प्राप्त हुआ; और दक्षिण पूर्व एशिया (भारत सहित) ने $ 375 मिलियन प्राप्त किए। भारत WHO दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र का एक सदस्य राज्य है।
  • अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ परियोजनाओं के लिए $ 62.2 मिलियन प्राप्त किए। यह वह क्षेत्र है जहाँ से विश्व स्वास्थय संगठन सर्वाधिक योगदान प्राप्त करता है तथा सबसे कम व्यय करता है

WHO की आलोचना का आधार :-

  • वायरस प्रसार के के प्रारंभिक चरण में जब कई राष्ट्रों द्वारा चीन पर व्यापारिक तथा यात्रा प्रतिबन्ध आरोपित किये गए तब विश्व स्वास्थय संगठन ने इस कदम का विरोध किया।
  • इसके साथ ही साथ अपनी प्रारंभिक वक्तव्यों में विश्व स्वास्थ्य संगठन मानव से मानव प्रसार को भी मान्यता नहीं देता रहा जिसके भयवाह परिणाम देखने को मिल रहे।

USA के इस कदम का वैश्विक प्रभाव :-

  • ट्रम्प प्रशासन द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन का वित्तीयन रोका जाना इस प्रकार की प्रथम घटना नहीं है।  इसके पूर्व अमेरिका द्वारा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनो का वित्तीयन रोका गया है।  अमेरिका द्वारा इस प्रकार के कदम चीन को वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका  बढ़ाने का अवसर प्रदान कर  रहा है।
  • इस संकट के समय जब लगभग  महत्वपूर्ण देश कोरोना संकट से ग्रस्त है ऐसे में अमेरिका द्वारा वित्तीयन रोकना लगभग आधी आबादी को संकट में डालने वाला कदम है वरन यह अमेरिका का वैश्विक नेतृत्वकर्ता  रूप में क्षवि को भी धूमिल करता है
  • अमेरिका का यह कदम प्रखर संरक्षणवादी नीति का सूचक है तथा यदि इसका अनुशरण ब्रिटेन तथा जर्मनी जैसे देशो ने किया तो यह कोरोना के विरुद्ध वैश्विक प्रयास को  बड़ा आघात लगेगा ।
  • इसके पूर्व करोनाबोन्ड के मुद्दे पर जर्मनी के नेतृत्व में कई यूरोपियन देश सामूहिक उत्तरदायित्व का विरोध कर रहे हैं ऐसे में अमेरिका का यह कदम इस महामारी के विरुद्ध सामूहिक उत्तरदायित्व को कम करेगा जो वैश्वीकरण  सिद्धांतो के भी विरुद्ध होगा।

भारत का योगदान

  • जहाँ एक ओर कई विकसित देश अपनी वैश्विक भूमिका में कमी ला रहे वहीँ दूसरी तरफ भारत अपनी वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को दृढ़ता के साथ निभा रहा।  भारत द्वारा क्षेत्रीय व वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक ज्ञान ,नियम तथा हायड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को उपलब्ध कराकर अपनी वैश्विक भूमिका के साथ मानवता की रक्षा हेतु सराहनीय कदम उठाये गए हैं।

WHO तथा भारत

  • भारत 12 जनवरी, 1948 को WHO संविधान का पक्षकार बना। दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए WHO क्षेत्रीय समिति का पहला अधिवेशन 4-5 अक्टूबर, 1948 को भारत के स्वास्थ्य मंत्री के कार्यालय में आयोजित किया गया, और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसका उद्घाटन किया। ।
  • भारत में डब्ल्यूएचओ टीकाकरण कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण भागीदार रहा है, टीबी से निपटने और राज्यों में कुष्ठ रोग और कालाजार, और पोषण कार्यक्रम जैसे उपेक्षित रोग के निदान में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही
  • कोरोना के निदान में भी भारत तथा विश्व स्वास्थय संगठन सहयोगी के रूप में कार्य कर रहे है