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Art & Culture-Part-1

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अंबुबाची मेला/ Ambubachi Mela

COVID-19 के कारण इस वर्ष गुवाहाटी (असम) के कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेला (Ambubachi Mela) का आयोजन नहीं किया जायेगा।

  • इस मेले का आयोजन गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर में पीठासीन देवी की वार्षिक माहवारी (Annual Menstruation) को दर्शाने वाले त्योहार के अवसर पर किया जाता है।
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कामाख्या मंदिर का निर्माण दानव राजा नरकासुर ने करवाया था। यह मंदिर नीलाचल पहाड़ियों (Nilachal Hills) के ऊपर अवस्थित है जिसका उत्तरी भाग ब्रह्मपुत्र नदी के तटीय ढाल तक जाता है।
    • किंतु इस मंदिर से संबंधित वर्ष 1565 के बाद के प्राप्त अभिलेखों में इसका पुनर्निर्माण कोच (Koch) साम्राज्य के राजा नर नारायण (Nara Narayana) ने कराया था।
  • कामाख्या, 51 शक्तिपीठों में से एक है जो शक्ति पंथ के अनुयायियों के लिये एक पवित्र स्थल है। शक्ति पंथ में ईश्वर की पूजा माता या देवी के रूप में की जाती है।
  • उल्लेखनीय है कि COVID-19 के कारण पिछली 6 शताब्दियों में पहली बार इस उत्सव का आयोजन नहीं किया जायेगा।

मेले का आयोजन

  • असम राज्य के गुवाहाटी शहर में आयोजित होने वाला यह पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव है। 
  • अंबुबाची मेले का आयोजन प्रत्येक वर्ष 21-25 जून के मध्य (असम के अहार (Ahaar) महीने में) जब सूर्य मिथुन राशि में होता है, किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि मेले के दौरान तीन दिन के लिये देवी के रजस्वला (Menstruation) होने के कारण कामाख्या मंदिर के कपाट स्वयं बंद हो जाते हैं। 

तुलोनी बिया रस्म-

  • ऐसा माना जाता है कि कामाख्या मंदिर में वार्षिक माहवारी (Annual Menstruation) को चिह्नित करने वाले कर्मकांड आधारित इस त्योहार के कारण भारत के अन्य हिस्सों की तुलना में असम में मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाएँ कम हैं।
  • असम में लड़कियों में नारित्त्व (Womanhood) की प्राप्ति एक रस्म के साथ मनाई जाती है जिसे तुलोनी बिया (Tuloni Biya) कहा जाता है जिसका अर्थ ‘छोटी शादी’ है।
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यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची/ UNESCO’s List of Intangible Cultural Heritage



यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची उन अमूर्त विरासत तत्वों से बनी है जो सांस्कृतिक विरासत की विविधता को प्रदर्शित करने में मदद करते हैं और इसके महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाते हैं।
यह सूची 2008 में स्थापित की गई थी जब अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए कन्वेंशन प्रभावी हुआ था।
अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए 2003 के यूनेस्को कन्वेंशन के अनुसार, सूची में पांच व्यापक श्रेणियाँ—

1. मौखिक परंपराएं,
2. कला प्रदर्शन,
3. सामाजिक प्रथाओं,
4. प्रकृति से संबंधित ज्ञान और अभ्यास
5. पारंपरिक शिल्पकारी।

भारत से इस सूची में शामिल अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल हैं:-


1. वैदिक जप की परंपरा।
2. रामलीला, रामायण का पारंपरिक प्रदर्शन।
3. कुटियाट्टम, संस्कृत थिएटर।
4. राममन, गढ़वाल हिमालय का धार्मिक त्योहार और अनुष्ठान थियेटर।
5. मुदियेट्टू, अनुष्ठान थिएटर और केरल का नृत्य नाटक।
6. कालबेलिया लोक गीत और राजस्थान के नृत्य।
7. छऊ नृत्य।
8. लद्दाख का बौद्ध जप: ट्रांस हिमालयन लद्दाख क्षेत्र, जम्मू और कश्मीर में पवित्र बौद्ध ग्रंथों का पाठ।
9. संकीर्तन, अनुष्ठान, मणिपुर का गायन, ढोलक और नृत्य।
10. जंडियाला गुरु, पंजाब के थेथर के बीच बर्तन बनाने के पारंपरिक पीतल और तांबे के शिल्प।
11. योग
12.नवाज़ (फारसी नया साल)
13. कुंभ मेला

अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में परिवर्धन-

संस्कृति मंत्रालय ने 100 से अधिक वस्तुओं की एक मसौदा सूची प्रकाशित की, जिन्हें अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में सूचीबद्ध किया जाना है, जिसमें शामिल
हैं

1. पारंपरिक लोक त्योहार, असम में पचोटी - जहां एक बच्चे का जन्म, विशेष रूप से एक पुरुष शिशु की परंपरा के रूप में "कृष्ण के जन्म से संबंधित है", रिश्तेदारों और पड़ोसियों के साथ मनाया जाता है,
2. ट्रांसजेंडर समुदाय की मौखिक परंपराओं को किन्नर कंठजीत कहा जाता है
3. अमीर खुसरो की रचनाएँ दिल्ली की प्रविष्टियों में से हैं।
4. गुजरात के पाटन से अपने ज्योमेट्रिक और आलंकारिक पैटर्न के साथ पटोला रेशम वस्त्र भी इस सूची में आए।
5. पूरे राजस्थान में पगड़ी या साफ़ा बांधने की प्रथा सूची का एक हिस्सा थी।
6. जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सूफियाना संगीत का कलाम भट या क़लामबाफ़त घराना।
7. मणिपुर में तंगखुल समुदाय द्वारा खोर, एक राइस बियर, साथ ही साथ अन्य शिल्प, जैसे कि लौकी के बर्तन और विकर बास्केट बनाना भी सूची में थे।
8. केरल का मार्शल आर्ट फॉर्म, कलारीपयट्टू।
9. केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में घरों और 10. मंदिरों के प्रवेश द्वार पर कोलम बनाने की प्रथा।
11. छाया कठपुतली थियेटर के विभिन्न रूप
12. महाराष्ट्र में चामिदाचा बाहुल्य,
13. आंध्र प्रदेश में तोलू बोम्मलत्ता,
14. कर्नाटक में तोगलू गोमेबेट्टा,
15. तमिलनाडु में तोलू बोम्मलट्टम,
16. केरल में तोल्पवा कुथु
17. उड़ीसा में रावणछाया
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देखो अपना देश: पर्यटन मंत्रालय का कार्यक्रम/Dekho Apna Desh

मानव जीवन पर कोविड-19 का प्रभाव सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बहुत ज्यादा पड़ा है। इसके कारण पर्यटन, एक क्षेत्र के रूप में, स्वाभाविक रूप से बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है क्योंकि घरेलू स्तर पर या सीमा पार से कोई आवागमन नहीं हो पा रहा है। लेकिन प्रौद्योगिकी के कारण, स्थानों और गंतव्यों तक आभासी रूप से पहुंचना और बाद के दिनों के लिए अपनी यात्रा की योजना बनाना संभव है। इन अभूतपूर्व समय में, मानव संपर्क को बनाए रखने के लिए प्रौद्योगिकी काम आ रही है और यह भी विश्वास है कि फिर से यात्रा करने के लिए जल्द ही समय अच्छा हो जाएगा।

इसको ध्यान में रखते हुए, पर्यटन मंत्रालय ने आज से अपनी ‘देखोअपनादेश” नामक वेबिनार श्रृंखला की शुरूआत की है जिससे हमारे अतुल्य भारत की संस्कृति और विरासत की गहरी और विस्तृत जानकारी प्रदान की जा सके। पहली वेबिनार, जो एक श्रृंखला का हिस्सा थी और प्रकाशित हुई, इसने दिल्ली के लंबे इतिहास को छूआ और यह 8 शहरों के रूप में सामने आया। प्रत्येक का चरित्र अपने आप में अद्वितीय था और जिसने अपने पीछे अवशेषों को छोड़ा, जिसके कारण दिल्ली एक शानदार शहर बना, जो कि वह आज है। इस वेबिनार का शीर्षक “सिटी ऑफ सिटीज- दिल्लीज पर्सनल डायरी” था।

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), ने कहा कि वेबिनारों की श्रृंखला एक निरंतर विशिष्टता वाली होगी और मंत्रालय अपने स्मारकों, पाक शैलियों, कलाओं, नृत्य के रूपों सहित भारत के विविध और उल्लेखनीय इतिहास और संस्कृति को प्रदर्शित करने की दिशा में काम करेगा, जिसमें प्राकृतिक परिदृश्य, त्योहार और समृद्ध भारतीय सभ्यता के कई अन्य पहलू भी शामिल हैं।

इस सत्र का मूल पर्यटन जागरूकता और सामाजिक इतिहास पर आधारित है। दिलचस्प उपाख्यानों से सजी हुई इस सत्र का आयोजन, पर्यटन मंत्रालय के लिए इंडिया सिटी वॉक द्वारा किया गया, जिसमें 5,546 पंजीकृत व्यक्तियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही और इसमें कई रोचक प्रश्न भी पूछे गए जो प्रतिभागियों की दिलचस्पी को दर्शाते हैं। इस वेबिनार को जल्द ही सार्वजनिक डोमेन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। यह इंस्टाग्राम और फेसबुक के माध्यम से मंत्रालय के सोशल मीडिया हैंडल- अतुल्य भारत पर उपलब्ध होगा।

देखोअपनादेश” वेबिनार श्रृंखला जारी रहेगी और भारत की विविधता, उल्लेखनीय इतिहास और संस्कृति को प्रदर्शित करने की दिशा में मंत्रालय काम करता रहेगा: प्रह्लाद सिंह पटेल( संस्कृति मंत्री)

स्रोत-PIB