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Telemedicine: A New Horizon in Public Health / टेलीमेडिसिन: सार्वजनिक स्वास्थ्य में एक नया क्षितिज-

वर्तमान में ‘टेलीमेडिसिन’ जिसे ई-स्वास्थ्य सुविधा का एक बेहतरीन उदाहरण माना जाता है, कि आवश्यकता को महसूस किया जा रहा है। इस समय संपूर्ण देश की स्वास्थ्य अवसंरचना COVID-19 महामारी के प्रसार को रोकने में लगी हैं। ऐसे में अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों के समक्ष चिकित्सीय सुविधाओं को प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। भारत में टेलीमेडिसिन और टेलीहेल्थ के वर्तमान परिदृश्य का मूल्यांकन करने का यह सही समय है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अध्ययन में यह पाया गया कि टेलीमेडिसिन भारत की संपूर्ण जनसंख्या के लिये बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धि कर सकता है, इससे मुख्यतः ग्रामीण आबादी अत्यधिक लाभान्वित होगी।

टाइम पत्रिका ने टेलीमेडिसिन को ‘हीलिंग बाई वायर’ (healing by wire) के नाम से संबोधित किया है। हालाँकि प्रारंभ में इसे ‘भविष्यवादी’ और ‘प्रायोगिक’ माना जाता था, लेकिन टेलीमेडिसिन आज एक वास्तविकता है। निश्चित ही भारतीय चिकित्सा क्षेत्र के कार्मिक कंप्यूटर के कुशल जानकार नहीं हैं, वस्तुतः चिकित्सा में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग के संबंध में जागरूकता और जोखिम की कमी है। ये भारत में टेलीमेडिसिन के विकास में सबसे बड़ी बाधा हैं। निस्संदेह, हमें तकनीकी जागरूकता की कमी को रुकावट नहीं बनने देना चाहिये और नवाचारों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिये।

क्या है टेलीमेडिसिन?-

  • टेलीमेडिसिन स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल के क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की एक उभरती हुई विधा है जहाँ सूचना प्रौद्योगिकी के साथ चिकित्‍सा विज्ञान के सहक्रियात्‍मक संकेन्‍द्रण से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्‍वास्‍थ्‍य के विभिन्न क्षेत्र जैसे- शिक्षा, प्रशिक्षण और प्रबंधन के अनेक अनुप्रयोगों के अलावा स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल प्रदायगी की चुनौतियों को पूरा करने की अपार संभाव्‍यता निहित है।
  • यह उतना ही प्रभावी है जितना एक टेलीफोन के ज़रिये चिकित्‍सा संबंधी किसी समस्‍या पर रोगी और स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ आपस में बात करते हैं।
  • ईसीजी, रेडियोलॉजिकल इमेज आदि जैसे नैदानिक परीक्षणों, चिकित्सीय जानकारी के लिये  इलेक्‍ट्रॉनिक चिकित्‍सा रिकॉर्ड भेजने और आईटी आधारित हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की सहायता से रियल टाइम आधार पर अंत:क्रियात्‍मक चिकित्‍सा वीडियो कॉन्‍फ्रेंस करना, उपग्रह और स्‍थलीय नेटवर्क द्वारा ब्रॉडबैंड के उपयोग से वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग जैसे जटिल कार्य करना भी इसका भाग है। 

टेलीमेडिसिन का इतिहास-

  • पिछले कुछ  वर्षों में टेलीमेडिसिन के द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में दी गई सेवाएँ दूरसंचार प्रौद्योगिकी के अपेक्षाकृत नए उपयोग के रूप में दिखाई देती हैं, सच्चाई यह है कि टेलीमेडिसिन विगत 30  वर्षों से किसी न किसी रूप में उपयोग में है। नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (National Aeronautics and Space Administration-NASA) ने टेलीमेडिसिन के शुरुआती विकास में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • टेलीमेडिसिन में NASA के प्रयास 1960 के दशक की शुरुआत में प्रारंभ हुए जब मानव ने अंतरिक्ष में उड़ान भरना शुरू किया। मिशन के दौरान फिजियोलॉजिकल पैरामीटर को अंतरिक्ष यान से प्रेषित किया गया था।  
  • टेलीमेडिसिन का सबसे शुरुआती प्रयोग एरिज़ोना प्रांत के ग्रामीण क्षेत्रों में निवास कर रहे लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को प्रदान करने के लिये किया गया।
  • वर्ष 1971 में नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के द्वारा अलास्का के 26 स्थलों को चुना गया ताकि यह देखा जा सके ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुँचाने की दिशा में तकनीकी द्वारा टेलीमेडिसिन का प्रयोग कितना कारगर है।  
  • वर्ष 1989 में नासा ने पहला अंतर्राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन कार्यक्रम प्रारंभ किया जिसके तत्त्वावधान में आर्मेनिया के येरेवन शहर में एक टेलीमेडिसिन चिकित्सा केंद्र स्थापित किया गया। इसके बाद अमेरिका में चार स्थलों पर टेलीमेडिसिन चिकित्सा केंद्र स्थापित किये गए, जो कंप्यूटर, इंटरनेट इत्यादि तकनीकी सुविधाओं से लैस थे।

भारत में टेलीमेडिसिन का विकास –

  • भारत में इसरो ने वर्ष 2001 में टेलीमेडिसिन सुविधा पायलट प्रोजेक्ट के साथ प्रारंभ की, जिसने चेन्नई के अपोलो अस्पताल को चित्तूर जिले के अरगोंडा गाँव के अपोलो ग्रामीण अस्पताल से जोड़ा था।
  • इसरो द्वारा की गई पहल में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, विदेश मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ राज्य सरकारों ने भी भारत में टेलीमेडिसिन सेवाओं के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा मानकीकृत टेलीमेडिसिन चिकित्सा दिशानिर्देश जारी किये गए और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा वर्ष 2005 में एक राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन टास्क फोर्स की स्थापना जैसे सकारात्मक कार्य किये गए।
  • इसरो का टेलीमेडिसिन नेटवर्क एक लंबा सफर तय कर चुका है। इस नेटवर्क में 45 दूरस्थ ग्रामीण अस्पतालों और 15 सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों को जोड़ने का कार्य किया का चुका है। दूरस्थ क्षेत्रों में अंडमान और निकोबार तथा लक्षद्वीप के विभिन्न द्वीप, जम्मू और कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्र, उड़ीसा के मेडिकल कॉलेज और अन्य राज्यों के कुछ ग्रामीण / जिला अस्पताल इस नेटवर्क में शामिल हैं।

टेलीमेडिसिन के क्षेत्र –

  • टेलीहेल्थ- टेलीहेल्थ लंबी दूरी की क्लिनिकल हेल्थकेयर, रोगी और पेशेवर स्वास्थ्य से संबंधित शिक्षा और प्रशिक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य प्रशासन का समर्थन करने के लिये इलेक्ट्रॉनिक सूचना और दूरसंचार प्रौद्योगिकियों का एक समूह है।
  • टेलीमेडिसिन परामर्श केंद्र– टेलीमेडिसिन परामर्श केंद्र वह स्थल है जहाँ रोगी उपस्थित होता है। एक टेलीमेडिसिन परामर्श केंद्र में, रोगी की चिकित्सा जानकारी को स्कैन / परिवर्तित करने, बदलने और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के साथ साझा करने के लिये उपकरण उपलब्ध होते हैं।
  • टेलीमेडिसिन स्पेशलिटी सेंटर- टेलीमेडिसिन स्पेशलिटी सेंटर एक स्थल है, जहाँ स्वास्थ्य विशेषज्ञ मौजूद रहते हैं। वह दूरस्थ स्थल में मौजूद रोगी के साथ बातचीत कर सकता है और उसकी रिपोर्ट देख सकता है तथा उसकी प्रगति की निगरानी कर सकता है।
  • टेलीमेडिसिन प्रणाली- टेलीमेडिसिन प्रणाली हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और संचार चैनल के बीच एक इंटरफेस है जो अंततः सूचनाओं का आदान-प्रदान करने और दो स्थानों के बीच टेलीकाउंसलिंग को सफल बनाने के लिये दो भौगोलिक स्थानों को जोड़ने का कार्य करता है। हार्डवेयर में एक कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, वीडियो-कांफ्रेंसिंग उपकरण आदि होते हैं। वहीँ सॉफ्टवेयर रोगी की जानकारी (चित्र, रिपोर्ट, फिल्म) आदि को सक्षम बनाता है। संचार चैनल कनेक्टिविटी को सक्षम करता है जिससे दो स्थान एक दूसरे से जुड़ सकते हैं।

टेलीमेडिसिन की उपयोगिता-

  • सुदूर क्षेत्रों तक आसान पहुँच। 
  • परिधीय स्वास्थ्य सेट-अप में टेलीमेडिसिन का उपयोग रोगी परिवहन में लगने वाले समय और लागत को काफी कम कर सकता है।
  • गंभीर देखभाल की निगरानी, जहाँ रोगी को स्थानांतरित करना संभव नहीं है।
  • चिकित्सा शिक्षा और नैदानिक ​​अनुसंधान जारी रखने में सहायता।
  • आपदा के दौरान चिकित्सीय सुविधाओं में किसी प्रकार की रुकावट नहीं।
  • टेलीमेडिसिन प्रौद्योगिकी के उपयोग से सबसे बड़ी उम्मीद यह है कि दूरसंचार स्थापित होने के बाद यह चिकित्सा पद्धतियों में विशेषज्ञता ला सकता है।
  • रोबोट्स का उपयोग करते हुए स्वास्थ्य टेलीमेटेड सर्जरी
  • यह महामारी की आशंका में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह स्थानीय और वैश्विक स्तर पर बीमारियों की रियल टाइम निगरानी में एक सक्षम विकल्प है। 

इस क्षेत्र में सरकार के प्रयास

  • संजीवनी- वर्ष 2005 में केंद्र सरकार ने टेलीमेडिसिन से संबंधित एक सॉफ्टवेयर जारी किया जिसे संजीवनी नाम दिया गया। इसे टेलीमेडिसिन के हाइब्रिड मॉडल के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है जो ‘स्टोर और फॉरवर्ड’ के साथ-साथ रियल टाइम की अवधारणा का उपयोग करता है।
  • सेहत- वर्ष 2015 में केंद्र सरकार ने दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन के ज़रिये विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अस्पतालों का नेटवर्क संचालित करने वाली कंपनी अपोलो अस्पताल के साथ मिलकर 60 हजार कॉमन सर्विस सेंटरों (सीएससी-Common Service Centre) में टेलीमेडिसिन सेवा ‘सेहत’ शुरू की है।
  • कॉनटेक- कॉनटेक’ परियोजना दरअसल ‘कोविड-19 नेशनल टेलीकंसल्टेशन सेंटर’ का संक्षिप्त नाम है। यह एक टेलीमेडिसिन केन्द्र है जिसकी स्थापना अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान., नई दिल्ली के द्वारा की गई है, जिसमें देश भर से विशेषज्ञों के बहु-आयामी सवालों का उत्तर देने के लिये विभिन्न नैदानिक क्षेत्रों के विशेषज्ञ डॉक्टर 24 घंटे उपलब्ध होंगे। यह एक बहु-मॉडल दूरसंचार केन्द्र है जिसके माध्यम से देश के अलावा विश्व के किसी भी हिस्से से दोनों ओर से ऑडियो-वीडियो वार्तालाप के साथ-साथ लिखित संपर्क भी किया जा सकता है।

इसके समक्ष चुनौतियाँ –

  • डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी ई-चिकित्सा या टेलीमेडिसिन के बारे में पूरी तरह से आश्वस्त और परिचित नहीं हैं।
  • टेलीमेडिसिन के परिणामों के बारे में रोगियों में विश्वास की कमी है।
  • भारत में तकनीक और संचार लागत बहुत अधिक है, कभी-कभी यह टेलीमेडिसिन को वित्तीय रूप से अक्षम बना देती है।
  • भारत में, लगभग 40% जनसंख्या गरीबी के स्तर से नीचे रहती है। ऐसे में इस वर्ग का तकनीकी रूप से दक्ष होना अत्यधिक कठिन है।
  • विभिन्न प्रकार के सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर द्वारा समर्थित ई-चिकित्सा को अभी भी परिपक्व होने की आवश्यकता है। सही निदान और डेटा के अन्वेषण के लिये, हमें उन्नत जैविक सेंसर और अधिक बैंडविड्थ समर्थन की आवश्यकता है।
  • टेलीमेडिसिन स्वास्थ्य सेवा के मामले में दिशानिर्देश बनाने व इन दिशानिर्देशों का उचित अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिये शासी निकाय का अभाव है।