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राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम -रासुका/ National Security Act-NSA:-

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लगाए लॉकडाउन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमले की घटनाओं के देख अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सख्त फैसला ले रही है। राज्य सरकार की ओर से आदेश जारी किया गया है अब जो लोग भी पुलिसकर्मियों पर हमला करेंगे उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी रासुका (NSA) लगा दिया जाएगा।देश में कई जगहों पर पुलिस और स्वास्थ्य कर्मियों पर हमले की खबरें आई हैं. बिहार के मुंगेर जिला के कासिमबाजार थाना क्षेत्र के हजरतगंज इलाके में कोरोना वायरस संक्रमण के संदिग्ध व्यक्ति की जांच के लिए नमूना लेने गयी डॉक्टरों और पुलिस की टीम पर स्थानीय लोगों ने पथराव किया।

इसके अलावा हाल ही में मुरादाबाद, राजस्थान के टोंक आदि में भी ऐसी घटनाएँ हुई है जँहा स्वास्थ्य कर्मी एवं सुरक्षा कर्मियों पर हमले हो रहे है । इसी संदर्भ में माँग की जा रही है कि यंहा भी U.P. की तरह NSA लागू किया जाए।

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA):-

  • राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) का उपयोग केंद्र तथा राज्य सरकारों द्वारा निवारक निरोध उपायों के रूप में किया जाता है।
  • NSA किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा उत्पन्न करने से रोकने हेतु केंद्र या राज्य सरकार को व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार देता है।
  • सरकार किसी व्यक्ति को आवश्यक आपूर्ति एवं सेवाओं के रखरखाव तथा सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने से रोकने के लिये NSA के अंतर्गत कार्यवाही कर सकती है।
  • किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने हिरासत में रखा जा सकता है। लेकिन सरकार को मामले से संबंधित नवीन सबूत मिलने पर इस समय सीमा को बढ़ाया जा सकता है।

NSA की पृष्टभूमि:-

  • भारत में निवारक निरोध कानून की शुरुआत औपनिवेशिक युग के बंगाल विनियमन- III, 1818 (Bengal Regulation- III, 1818 से मानी जाती है। इस कानून के माध्यम से सरकार, किसी भी व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रियाओं से गुज़रे बिना सीधे ही गिरफ्तार कर सकती थी।
  • एक सदी बाद ब्रिटिश सरकार ने रोलेट एक्ट, 1919 (Rowlatt Acts-1919) को लागू किया, जिसके तहत बिना किसी परीक्षण (Trial) के संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार करने की अनुमति दी गई।
  • स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1950 में निवारक निरोधक अधिनियम (Preventive Detention Act- PDA) बनाया गया, जो 31 दिसंबर, 1969 तक लागू रहा।
  • वर्ष 1971 में आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (Maintenance of Internal Security Act- MISA) लाया गया जिसे वर्ष 1977 में जनता पार्टी सरकार द्वारा निरस्त कर दिया गया। बाद में कॉंग्रेस सरकार द्वारा पुन: NSA लाया गया।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ,राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से जुड़ा एक कानून है।वर्तमान में यही क़ानून प्रभावी है।

NSA के साथ विवाद:-

  • मूल अधिकारों से टकराव:
    • सामान्यत: जब किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है, तो उसे कुछ मूल अधिकारों की गारंटी दी जाती है। इनमें गिरफ्तारी के कारण को जानने का अधिकार शामिल है। संविधान के अनुच्छेद 22 (1) में कहा गया है कि एक गिरफ्तार व्यक्ति को परामर्श देने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। हालाँकि निवारक निरोध के तहत गिरफ़्तारी हो सकती है।
  • आपराधिक प्रक्रिया संहिता से टकराव:
    • आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code- Cr.PC) की धारा 50 के अनुसार गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार तथा जमानत के अधिकार के बारे में सूचित किया जाना चाहिये। इसके अलावा Cr.PC की धारा 56 तथा 76 के अनुसार गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर एक व्यक्ति को अदालत में पेश किया जाना चाहिये। इनमें से कोई भी अधिकार NSA के तहत हिरासत में लिये गए व्यक्ति को उपलब्ध नहीं है।
  • आँकड़ों की अनुपलब्धता:
    • National Crime Records Bureau- NCRB जो देश में अपराध संबंधी आँकड़े एकत्रित तथा उनका विश्लेषण करता है, NSA के तहत आने वाले मामलों को अपने आँकड़ों में शामिल नहीं करता है क्योंकि इन मामलों में कोई FIR दर्ज नहीं की जाती है। अत: NSA के तहत किये गए निवारक निरोधों की सटीक संख्या के आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

स्रोत: THE HINDU