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IMD का मानसून अनुमान/IMD-Monsoon Forecast-

चर्चा में क्यों?-

• एक और जहां कोरोना के कारण भारत की अर्थव्यवस्था की हालत ख़राब हो रही है वहीं दूसरी और IMD के इस अनुमान ने कुछ राहत प्रदान की है।

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग( India Meteorological Department- IMD) के अनुसार, वर्ष 2020 में सामान्य मानसून रहने की संभावना है।
  • IMD के अनुसार वर्ष 2020 में सामान्य मानसून (अगस्त तथा सितंबर में सामान्य से अधिक) रहने की संभावना है।
  • IMD दो-चरणीय मानसून पूर्वानुमान जारी करता है:
    • पहला पूर्वानुमान अप्रैल माह में जबकि दूसरा मई माह के अंतिम सप्ताह में जारी किया जाता है। मई माह में विस्तृत मानसून पूर्वानुमान जारी किया जाता है।

सामान्य वर्षा की परिभाषा में बदलाव:-

  • ‘लंबी अवधि के औसत’ (Long Period Average- LPA) वर्षा का उपयोग, मानसून की ‘सामान्य वर्षा’ की गणना करने में किया जाता है। LPA वर्ष 1961-2010 की अवधि के दौरान हुई वर्षा का औसत मान है। LPA के आधार पर पूरे देश में मानसून की सामान्य वर्षा 88 सेमी है।
  • ‘सामान्य वर्षा’ (Normal Rainfall) की परिभाषा को फिर से परिभाषित किया गया है। इसे 89 सेमी. से घटाकर 88 सेमी. कर दिया गया है। मानसून मौसमी में वर्षा के सामान्य से ± 5% विचलन के साथ के ‘सामान्य वर्षा’ होने की संभावना है।

सामान्य मानसून के आधार: –

  • मानसून पूर्वानुमान के मॉडल:
    • मानसून पूर्वानुमान के Dynamical Mode जो सुपर कंप्यूटर पर आधारित है, के अनुसार, इस बार मानसून के समय सामान्य से अधिक वर्षा होने की उच्च संभावना (70%) है।
    • Statistical Models के अनुसार, इस बार सामान्य मानसून की 41% संभावना है जबकि इस मॉडल पर पूर्ववर्ती वर्षों में 33% संभावना रहती थी।
  • अल-नीनो (El-Nino):
    • भारत में अल-नीनोके कारण सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है जबकि, ला-नीनो के कारण अत्यधिक वर्षा होती है।
    • IMD के अनुसार इस बार अल-नीनो का भारतीय मानसून पर नगण्य प्रभाव रहेगा।
  • हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole- IOD):
    • IOD भी भारतीय मानसून को प्रभावित करता है। सकारात्मक IOD के दौरान मानसून की वर्षा पर सकारात्मक और नकारात्मक IOD के दौरान मानसून की वर्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
    • पूर्वानुमान के अनुसार, Indian Ocean Dipoleके ‘तटस्थ’ रहने की उम्मीद है।

सामान्य मानसून का महत्त्व:-

  • खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि:
    • वर्षा अच्छी होने का सबसे अच्छा प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ता है। जहाँ सिंचाई की सुविधा मौजूद नहीं है, वहाँ वर्षा होने से अच्छी फसल होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • विद्युत संकट में कमी:
    • यदि वर्षा कम हो और जलस्तर कम हो जाए तो बिजली उत्पादन भी प्रभावित होता है।यदि अच्छी वर्षा होगी तो जलाशयों में पर्याप्त पानी आएगा जिससे विद्युत उत्पादन में सुधार होगा।
  • जल संकट का समाधान:
    • अच्छे मानसून से पीने के पानी की उपलब्धता संबंधी समस्या का भी काफी हद तक समाधान होता है। दूसरे, भूजल का भी पुनर्भरण होता है।
  • वर्षा के पूर्वानुमान से, सरकार तथा किसानों को बेहतर रणनीति बनाने में सहायता मिलती है। सरकार इसके माध्यम से सूखा या बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिये सुरक्षात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए बेहतर तैयारियाँ कर सकती है।
  • साथ ही यदि मानसून अच्छा रहा तो से कोरोना के कारण अर्थव्यवस्था को हुए नुक़सान की भरपाई में भी मदद मिल पाएगी।

स्रोत: The Hindu