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India and Covid-19 Pandemic- Impacts,Measures& Challenges/ भारत एवं कोरोना वाइरस महामारी- प्रभाव,उपाय व चुनोतियाँ

Covid -19

कोरोना वाइरस विश्व भर में 30 हज़ार से अधिकलोगों जीवन लील चुका है और इससे लाखों लोग संक्रमित हो चुके है।

भारत भी इस महामारी का सामना कर रहा है भारत के क़रीब 30 लोगों की मृत्यु हो गई है और क़रीब 1500 लोग इससे संक्रमित हो चुके है।

हालाँकि भारत में अभी तक कम्यूनिटी ट्रैन्स्मिशन नही हुआ है और इटली तथा अमेरिका जैसे हालात नही है लेकिन यदि एसा होता है तो स्तिथि भयावह होगी।

Covid-19 है क्या/ what is covid-19?

इसका नाम लैटिन भाषा के शब्द corona पर आधारित है जिसका अर्थ है crown ।

इसे आरम्भ में वुहान वाइरस ( चीन) के नाम से जाना गया।

11 फ़रवरी 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) ने इसे आधिकारिक रूप से इसे नोवेल कोरोना वाइरस या Covid-19 नाम दिया।

इस वाइरस का ओरिजिन कैसे हुआ यह अभी तक पूर्ण रूप से ज्ञात नही है।अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी शुरुआत वुहान(चीन) के seafood market से हुई।

यह वाइरस वास्तव में पशु से मानव में फैला है, सम्भवतः यह चमगादड़( bats) के सूप के माध्यम से मानव तक पहुँचा।

Seafood market wuhan

यह वाइरस चीन से आरम्भ होकर विश्व के क़रीब 200 देश तक पहुँच चुका है।

India and covid-19/भारत और कोरोना वाइरस—

भारत में इसके क़रीब 1500 मामले सामने आ चुके है तथा 30 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

भारत सरकार ने क्या प्रयास किए?—

भारत सरकार ने इसे आपदा घोषित किया।आपदा घोषित होने के बाद राज्यों को यह अधिकार प्राप्त हो ग़या वे राज्य आपदाराहत कोष का प्रयोग कर सकेंगे। राज्य अस्थाई आवास बनाना आरम्भ कर सकते है ताकि संदिग्ध लोगों को अलग रखा जा सके।लोगों के लिए राहत कार्य आरम्भ कर सकते है विशेषकर असंगठित क्षेत्र के लोगों व ग़रीबों के लिए।जाँच के लिए अतिरिक्त लैब की व्यवस्था कर सकते है।

जनता कर्फ़्यू/janata curfew-प्रधानमंत्री के आवाहन पर २२ मार्च को प्रातः7 बजे से रात्रि 9 बजे तक जनता कर्फ़्यू रखा गया। यह वास्तव में लॉक डाउन से पहले की रिहर्सल थी। जनता कर्फ़्यू को लोगों का व्यापक समर्थन मिला।

ः21-DayLockdown/21 दिन का लॉक डाउन— प्रधानमंत्री ने Epidemic Disease Act-1897 तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत 21 दिनों के सम्पूर्ण लॉक डाउन की घोषणा की( 24 मार्च को)। इस लॉक डाउन के अंतर्गत—

A-यातायात को स्थगित किया गया।

B-मैजिस्ट्रेट को विशेष अधिकार दिए गए।

C-आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर अन्य सभी प्रकार की वस्तु व सेवा कार्य को प्रतिबंधित किया गया।

ःआर्थिक राहत की घोषणा-भारत सरकार ने असंगठित क्षेत्र, किसानों , ग्रामीण श्रमिकों आदि के लिए 1 लाख 70 हज़ार करोड़ रुपए के राहत पैकेज़ की घोषणा की।

RBI के द्वारा राहत कार्य- RBI ने तीन माह के लोन EMI की राहत दी( हालाँकि यह बैंकों पर छोड़ा गया की वे किस तरह राहत देंगे) साथ ही RBI ने CRR, रेपो रेट आदि में भी छूट की घोषणा की ताकि बाज़ार में तरलता की कमी ना रहे( लॉक डाउन के दौरान व बाद में भी)

RBI Governor

21 दिन के लॉक डाउन का प्रभाव—

1-भारी संख्या में मज़दूरों का पलायन आरम्भ हुआ, ये वे मज़दूर है जो अपने राज्य को छोड़कर काम हेतु किसी अन्य राज्य में गए थे।

2- ग्रामीण क्षेत्र में किसानों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा क्योंकि यह फसल कटाई का समय है।

3- आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर अविश्वास उत्पन्न हुआ जिससे जिससे जमाख़ोरी को भी बढ़ावा मिला।

4-भारत का असंगठित क्षेत्र अत्यधिक प्रभावित हुआ, इससे न केवल भारत का सकल घरेलू उत्पाद प्रभावित हुआ वरण मज़दूरों में ग़रीबी एवं भुखमरी में वृद्धि हुई क्योंकि लोग लम्बे समय तक बेरोज़गार हो गए।

5- लोगों में जागरूकता की कमी के कारण अनेक स्थानों पर प्रशासन को बल प्रयोग भी करना पड़ा।

भारत के सामने चुनोतियाँ( Challenges while combating covid19)—

1-Limited Testing Facilities/ सीमित जाँच सुविधा- भारत में जाँच की सुविधा अत्यधिक कम हैं ।अभी तक क़रीब 40 हज़ार जाँचे ही हो सकी है, जबकि आबादी १३० करोड़ है इस अनुपात में यह अत्यधिक कम है।लेकिन covid-19 को रोकने के लिए अत्यधिक जाँच आवश्यक है।

2-Lack of Strong Healthcare/अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव-यह भी एक बड़ी चुनोति है।विकसित देशों के मुक़ाबले भारत में सुविधाएँ अत्यधिक कम है। सबसे अधिक ज़रूरत वैंटीलेटर की होगी , भारत में इनकी अत्यधिक कमी है। भारत क़रीब 70% वैंटीलेटर आयात करता है जबकि इस समय इनकी व्यापक माँग है अतः पूर्ति में दिक़्क़त हो रही है।

3- Limited Number of beds in hospital/अस्पताल में सीमित पलंग—भारत में प्रति 1000 व्यक्तियों पर क़रीब 0.55 ही पलंग है। चीन में यह प्रति 1000 व्यक्तियों पर 4.3 पलंग है।इसका आशय है की यदि कम्यूनिटी ट्रैन्स्मिशन होता है तो निपटना मुश्किल होगा।

4-Population Density/ जनसंख्या घनत्व-भारत में जनसंख्या अत्यधिक सघन है प्रति वर्ग किलो मिटर में क़रीब 450 लोग निवास करते है। भारत के दिल्ली ,मुंबई,कोलकाता,चेन्नई,बंगलुरु,जयपुर आदि नगर अधिक सघन है और साथ ही इनकी एक बड़ी आबादी झुग्गियों में भी निवास करती है। यदि यहाँ इटली की तरह कोरोना फैला तो हालात क़ाबू में नही आएँगे।

5-India’s Elderly At High Risk/ भारत की वृद्ध आबादी – भारत में १० करोड़ से भी अधिक लोग एसे है जिनकी आयु 60 वर्ष से अधिक है यह आबादी इटली की कुल जनसंख्या से भी अधिक है। और यह सर्वविदित है कि कोरोना इस आयु वर्ग को सर्वाधिक प्रभावित करता है।

6-Lack of knowledge about covid-19 in common peoples/ आम लोगों में कोरोना को लेकर जानकारी का अभाव है।

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HISTORY BEHIND THE ORIGIN AND ABOLITION OF SATI SYSTEM IN INDIA/ भारत में सती प्रथा का आरम्भ एवं समाप्ति।

इस कुप्रथा का आरम्भ संभवतःगुप्तकाल के आसपास हुआ था। गुप्त शासक भानुगुप्त के एरण अभिलेख(510 ईस्वी) में इस प्रथा के बारे में उल्लेख मिलता है।इस प्रथा के तहत स्त्री अपने पति के शव के साथ स्वयं को भी जला लेती थी। इसके पर्याप्त साक्ष्य है कि इसके लिए समाज का दबाव होता था तथा सती होने वाली महिला को नशीला पदार्थ खिला दिया जाता था ताकि उसे कुछ पता ना चला। जब भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना हुई तब भी इस प्रथा का प्रचलन था।कम्पनी के प्रयास-

कम्पनी इस प्रथा को समाप्त करने के सम्बंध में बहुत अधिक सावधानी से कार्य कर रही थी क्योंकि इस समय कम्पनी को विद्रोह का डर था। १८ वीं सदी के अंत तक कलकत्ता सप्रीम कोर्ट ने भी इस प्रथा को समाप्त करने के प्रयास आरम्भ कर दिए थे।इसी समय श्रीरामपुर ,चिनसुरा,चंद्रनगर आदि स्थानों पर इस प्रथा को हतोत्साहित किया जाने लगा था। 1770 से 1780 के मध्य बम्बई प्रेज़िडेन्सी ने भी सी पर प्रतिबंध का प्रयास किया था।लेकिन कोई क़ानून नही बनाया जा सका ।
शाहबाद के कलेक्टर एम. एच. ब्रुक ने कार्नवालिस को लिखा था इस कुप्रथा को रोकने के लिए नियम बनाने की ज़रूरत है लेकिन गवर्नर जनरल हिचकिचा रहा था क्योंकि उसे विद्रोह का डर था।कार्नवालिस ने अपने लोगों को सलाह दी थी कि वे इस प्रथा को हतोत्साहित करे लेकिन बल प्रयोग ना करे।
1813 में मजिस्ट्रेटों तथा अन्य अधिकारियों को यह अधिकार दिया गया कि वे एक स्त्री को सती होने से उस दशा में रोक सकते है यदि सती होने के लिए बल प्रयोग किया गया हो या वह नाबालिग हो या गर्भवती हो।
1817 में यह नियम बनाया गया कि एसी स्त्री सती नही हो सकती जिसके नाबालिग संतान हो जिसकी देखभाल करने वाला कोई ना हो।लेकिन सरकार ने पूर्ण प्रतिबंध नही लगाया।

भारतीयों का योगदान-

उपर्युक्त परिस्थितियों में ही कुछ प्रगतिशील भारतीयों ने भी प्रयास आरम्भ किए।राजा राम मोहन राय इनमे अग्रणी थे।राम मोहन राय ने अपनी भाभी को सती होते हुए देखाथा।

राजा राम मोहन राय

राजा राम मोहन राय ने 1818 में सरकार को पत्र लिखकर बताया था कि यह प्रथा शास्त्रों के अनुसार आत्महत्या है ।इन्होंने संवाद कौमुदी नामक पत्रिका के माध्यम से सती प्रथा के विरुद्ध जनमत तैयार करने का प्रयास किया।
लेकिन इसी समय राधाकान्त देव के नेतृत्व में कुछ रूढ़िवादी नेताओ ने सती प्रथा के समर्थन में प्रचार आरम्भ किया इन्होंने चंद्रिका नामक पत्रिका के माध्यम से यह कार्य कियाथा।

विलियम बैंटिक का प्रयास-

इन्ही परिस्तिथियों में जुलाई 1828 में विलियम बैंटिक भारत आया , यह सुधारवादी विचारोंसे युक्त था।

विलियम बैंटिक

राधाकान्त देव ने चंद्रिका नामक पत्रिका के माध्यम से बैंटिक को बताया कि सती प्रथा एक आदरणीय प्रथा है सरकार इसे समाप्त ना करे लेकिन बैंटिक ने ध्यान नही दिया।
4 दिसम्बर 1829 को रेग्युलेशन 17th के माध्यम से सती प्रथा को बंगाल में दंडनीय अपराध घोषित कर दिया गया।1830 में इसे बम्बई व मद्रास में भी अपराध घोषित कर दिया गया।
लेकिन अभी तक यह ब्रिटिश भारत में ही लागू हुआ। धीरे धीरे देशी रियासतों ने भी अपराध घोषित किया जैसे अहमदनगर(1836),जूनागढ़(1838),सतारा(1846),पटियाला(1847) आदि।हालाँकि इसके बाद भी रूढिवादियों ने प्रयास जारी रखा इन्होंने जनवरी1830 में England की प्रिवी काउन्सिल में अपील की जिसे 1832 में ख़ारिज कर दिया गया ।
इस तरह सती प्रथा सैद्धांतिक रूप से समाप्त हो गई लेकिन व्यावहारिक रूप में इसका प्रचलन स्वतंत्रता के बाद भी जारी रहासितम्बर 1987 मै राजस्थान के सिकर ज़िले में रूप कंवर सती हुई थी।

रूप कंवर सती स्थल

रूप कंवर सती कैस भारत में सती प्रथा का अंतिम ज्ञात कैस माना जाता है।