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DISCUSSION SCIENCE AND TECHNOLOGY

COVID-19 के दौर में नवीन प्रौद्योगिकी का प्रयोग/ Use of new Technology in the era of COVID-19

  • COVID-19 के लॉकडाउन के कारण, भारत को भोजन, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
  • कोविद -19 महामारी ने भारत में कई उद्योगों को प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए अप्रत्याशित रूप से उत्प्रेरित किया है।
  • एक विस्तारित लॉकडाउन से प्रेरित होकर, लोग नियमित ,खाद्य-वितरण, चिकित्सा परामर्श या शिक्षा कार्यों के लिए नए समाधान की तलाश कर रहे हैं।
  • “अपने स्वास्थ्य के बारे में सूचित या सुरक्षित रहने के लिए, प्रौद्योगिकियों का उपभोक्ता, तनावपूर्ण अवधि में विश्वास पैदा कर सकता है, और यह प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों और समाधानों के व्यापक, दीर्घकालिक अपनाने पर जोर देने के लिए अप्रत्याशित उत्प्रेरक हो सकता है।
  • ब्रांड्स, अपने घरों तक ही सीमित रहने वाले उपभोक्ताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए, पुराने और नए के बीच उपन्यास गठजोड़ की जा रही है।
  • उदाहरण के लिए, सुपरमार्केट चेन बिग बाजार ने आवश्यक सामान पहुंचाने के लिए बाइक एग्रीगेटर रैपिडो और फूड डिलीवरी सर्विस स्कूटी की भागीदारी की है। इस बीच, मैरिको जैसे उपभोक्ता दिग्गज, उत्पादों की डिलीवरी के लिए फूड एग्रीगेटर ज़ोमैटो और स्विगी का प्रयोग कर रहे हैं।
  • यहां तक कि सरकार निगरानी के लिए नए तरीके अपना रही है, जो आने वाले दिनों में सामान्य हो सकते हैं।

तकनीकी का विभिन्न क्षेत्र में प्रयोग:-

टेलीमेडिसिन में प्रयोग

  • इस उभरते हुए क्षेत्र ने कुछ समय के लिए स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को स्मार्टफ़ोन और वीडियो कॉल पर दूरस्थ स्थानों में रोगियों का निदान करने की अनुमति दी है। परन्तु यह क्षेत्र न केवल स्वयं बढ़ रहा , बल्कि तेजी से देश में दैनिक जीवन का हिस्सा बन गया है।
  • प्रैक्टो, पोर्टिया और लाइबेट जैसे स्टार्टअप, जो रिमोट मेडिकल चेकअप की सुविधा प्रदान करते हैं। वे “एक सामाजिक दूरी बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं ताकि नर्सिंग होम, और अस्पताल के वेटिंग रूम में वायरस न पहुंचे।
  • इसकी अपरिहार्यता को महसूस करते हुए, भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने लॉक डाउन में 25 मार्च को टेलीमेडिसिन के लिए नए दिशानिर्देशों को रेखांकित करते हुए एक दस्तावेज़ जारी किया।
  • कोरोनवायरस-संबंधी चिंताओं से परे, लोग अन्य मुद्दों के लिए कॉल और चैट की ओर भी रुख कर रहे हैं। डायबिटीज देखभाल और प्रबंधन ऐप बीटीओ रोगियों को अपने नियमित चिकित्सक को प्लेटफॉर्म पर जोड़ने का विकल्प देकर वास्तविक जीवन के अनुभव का अनुकरण करने की कोशिश कर रहा है।

ओपन-सोर्स डिजाइन में प्रयोग

  • कोविद -19 से लड़ने वाले स्वास्थ्य सेवा और फ्रंटलाइन श्रमिकों के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) की कमी ने खुले स्रोत के डिजाइन का उपयोग करके बड़े पैमाने पर विनिर्माण को अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
  • टेक इनोवेटर्स, भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के अलावा, विभिन्न हैकथॉन के लिए वेंटिलेटर, परीक्षण किट, संपर्क ट्रेसिंग के लिए एप्लिकेशन और लिफ्ट और बाकी कमरों के लिए संपर्क रहित डिवाइस बनाने के लिए अन्य सुविधाओं के निर्माण हेतु कॉल किया है। कुछ ने कार्यशील प्रोटोटाइप बनाने में भी सफलता प्राप्त की है।
  • मेकर असाइलम, जो मुंबई और नई दिल्ली में एक सामुदायिक हैकरस्पेस है, ने हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए फेस शील्ड्स तैयार किए हैं। एम -19 शील्ड को प्रोटोटाइप के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए किसी के द्वारा केवल तीन मिनट में बनाया जा सकता है। प्रत्येक फेस शील्ड को रु 55 से कम के लिए बनाया जा सकता है। निर्माता की शरण का अनुमान है कि देश में 500 हैकरस्पेस हैं जो एम -19 के डिजाइन को दोहरा सकते हैं जो स्वयं खुला स्रोत है और सॉफ्टवेयर विकास प्लेटफॉर्म GitHub पर प्रकाशित किया गया है।
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर में बायोसाइंसेज और बायोइंजीनियरिंग शोधकर्ताओं की टीम से एक और महत्वपूर्ण नवाचार आया है। इसने एक पूर्ण पीपीई किट विकसित की है, जब बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है, तो इसकी कीमत 100 रुपये से कम होगी।

ऑनलाइन शिक्षा में प्रयोग

  • मार्च में भारत के स्कूल और शैक्षणिक संस्थान बंद हो गए, शिक्षा प्रौद्योगिकी, या एड-टेक, नितांत रूप से आवश्यक हो गए।
  • कौरसेरा जैसे प्लेटफार्मों को भारत में एक बड़े ग्राहक आधार के रूप में देखते हुए, उन्हें पारंपरिक लोगों के विकल्प के बजाय शिक्षा के पूरक तरीकों के रूप में देखा गया। इसके अलावा, एड-टेक विशेष पाठ्यक्रम और मॉड्यूल तक सीमित था।
  • शहरी भारत में बड़ी संख्या में स्कूल ऑनलाइन कक्षाओं में स्थानांतरित हो गए हैं।
  • हालाँकि, यह चिंता छोटे शहरों और गाँवों में है, जिनमें से इंटरनेट बुनियादी ढाँचा नहीं है। फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के व्यापक रूप से अपनाने के कारण अंततः ई-तकनीक को बढ़ावा मिलेगा, जो कुलीन संस्थानों और आबादी व्यय सीमा में आ सके है।

निगरानी रखने में

  • भारत के अस्पतालों से भागकर और घर से बाहर रहने वाले लोगों के साथ घबराहट के कारण, अधिकारियों को निगरानी तकनीकों को स्वीकारने के लिए मजबूर किया गया।
  • कुछ ही समय में, सेलफोन जैसे व्यक्तिगत उपकरणों को कोविड -19 के खिलाफ लड़ाई में तैनात किया गया था। सामान्य परिस्थितियों में, इससे निजता की चिंता बढ़ जाती।
  • भारत सरकार ने 6 अप्रैल को आरोग्य सेतु ऐप लॉन्च किया।
  • कर्नाटक सरकार ने 18 मार्च को राज्य विधान सभा को सूचित किया कि वह लोगों के फोन को क्वारंटआइन ट्रैक करेगी। इसके अतिरिक्त, कर्नाटक में घर से बाहर रहने वाले व्यक्तियों को क्वारेंटाइन वॉच एंड्रॉइड के माध्यम से हर घंटे अपनी सेल्फी अपलोड करनी होती है।
  • एक अन्य दक्षिणी राज्य केरल रोगियों को ट्रैक करने के लिए स्थान डेटा और सीसीटीवी फुटेज का उपयोग कर रहा है। अधिकारियों ने कोरोनोवायरस रोगियों के प्राथमिक और द्वितीयक संपर्कों को ट्रैक करने के लिए कॉल रिकॉर्ड और जीपीएस का भी उपयोग किया है।

ड्रोन तकनीक का प्रयोग

  • भारत अभी तक इस तकनीक में बहुत आगे नहीं बढ़ा है। COVID-19 के दौरान पुलिस और नागरिक अधिकारियों ने इसके उपयोग की बात की है ।
  • हवाई निगरानी बड़े समारोहों को ट्रैक करने में मदद करती है, भौतिक संपर्क को कम करती है और संकीर्ण वाहनों की निगरानी करती है जहां पुलिस वाहन प्रवेश नहीं कर सकते हैं। उनका उपयोग सार्वजनिक स्थानों और आवासीय कॉलोनियों में कीटाणुनाशक स्प्रे करने के लिए भी किया जा सकता है।
  • भविष्य में, ड्रोन गोपनीयता के मुद्दों को जन्म दे सकते हैं।
  • एक संतुलन को एक मजबूत ढांचे के भीतर स्थापित किया जाना चाहिए, जो सामुदायिक कल्याण की मांग करते हुए नागरिक अधिकारों को मान्यता देता है।

प्रौद्योगिकी के प्रयोग से लाभ :-

  • यह लॉक डाउन से होने वाले आर्थिक हानियों को कम करने में सहायक होगा एक अनुमान के अनुसार 2025 तक, भारत 800 बिलियन डॉलर से 1 ट्रिलियन (देश के नाममात्र जीडीपी के 18-23 प्रतिशत के बराबर मूल्य) की डिजिटल अर्थव्यवस्था बना सकता है।
  • यह शैक्षिक हानि को भी कम करेगा। विद्यालयों द्वारा ऑनलाइन एजुकेशन सिस्टम को स्वीकरना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
  • आरोग्य सेतु जैसे एप्स सोशल डिस्टेंसिंग के साथ के वास्तविक तत्वार्थ को सिद्ध करेगा।
  • यह डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं को प्रेरित करेगा।
  • ई -नाम जैसी तकनीक कृषि विपणन में सहायक होंगी।

प्रौद्योगिकी के प्रयोग से हानियां-

  • यह आगे चलकर लोगों की निजता को प्रभावित कर सकता है।
  • अभी भी भारत में डिजिटल निरक्षरता व्यापक रूप से प्रभावी है। इसके परिणाम स्वरूप लोगों के साथ अनेक प्रकार की धोखाधड़ी की सम्भावना बनी रहतीहै।

प्रौद्योगिकी के सामने चुनोतियां-

1. भारत की सामान्य जनता नवीन तकनीक से अपडेट नही है।

2. भारत के ग्रामीण क्षेत्र में अभी भी इंटरनेट की अच्छी गति नही है।

3. भाषा एक बड़ी चुनोति है अधिकांश लोगों को अंग्रेज़ी की समझ नही है जबकि सूचनाएँ मुख्यतः अंग्रेज़ी में ही उपलब्ध होती है.

4. भारत में इस क्षेत्र में निवेश की दर अन्य देशों से काफ़ी कम है।

5. उच्च प्रोधोगिकी के प्रयोग के लिए अधिक मात्रा में धन की ज़रूरत होती है जबकि एक बड़ी आबादी ग़रीबी में जीवन जी रही है।

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Atal Bhujal Yojna-Will it Solve India’s Water Crisis?/ अटल भूजल योजना-क्या यह भारत के जल संकट को दूर कर सकेगी?

भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 95वें जन्म दिवस पर(25 दिसम्बर 2019) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अटल भूजल योजना को आरम्भ किया।

अटल भूजल योजना विश्व बैंक से भी वित्त पोषित होगी। यह एक केंद्रीय योजना । विश्व बैंक ने 2018 में ही इस योजना का अनुमोदन कर दिया था।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर भूजल स्तर में सुधार करना है।

भारत की स्तिथि

भारत में विश्व की कुल आबादी का क़रीब 16% लोग निवास करते है जबकि विश्व के पीने योग्य पानी का केवल 4% ही भारत में है।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सिंधु, कावेरी, कृष्णा, सुवर्णरेखा, पेन्नार, माही, साबरमती आदि नदियाँ जल की कमी से जूझ रही है अर्थात इनमे इनकी क्षमता से कम पानी रह गया है।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 2025 में भारत में प्रतिव्यक्ति जल उपलब्धता 1434 क्यूबिक मीटर होगी जो 2050 में कम होकर 1219 क्यूबिक मीटर रह जाएगी।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार यदि प्रतिव्यक्ति जल उपलब्धता 1700 क्यूबिक मीटर से कम होती है तो इसे जल तनाव ( Water stressed conditions) कहा जाता है जबकि यदि यह 1000 क्यूबिक मीटर से कम हो जाए तो इसे ज़ल अभाव( water scarcity conditions) कहा जाता है।

भारत की जनसंख्या तेज़ी से बढ़ रही ऐसे में पानी की आवश्यकता में भी तेज़ी से वृद्धि होगी।

भारत के 15 राज्यों में कुल भूजल का 90% हिस्सा है जैसे- उत्तर प्रदेश-16.2%, मध्य प्रदेश-8.4%, महाराष्ट्र-7.3%, बिहार-7.2%, पश्चिम बंगाल-6.8%, असम-6.6% आदि।

उत्तर भारत विशेषकर दिल्ली , हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कल संसाधनों का अत्यधिक दोहन हुआ है। यंहा के 60 % से अधिक जल संसाधन विकट स्तिथि में है।

अटल भूजल योजना—

* आरम्भ में यह योजना 7 राज्यों( गुजरात, हरियाणा,कर्नाटक,मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र,राजस्थान व उत्तर प्रदेश) में लागू किया जाएगा।

* इस योजना को 5 वर्ष (2020-21 से 2024-25) के लिए लागू किया जाएगा।

* इसके तहत 78 ज़िलो की 8350 ग्राम पंचायतों में जल संकट की समस्या का समाधान किया जाएगा व परिस्थिति के अनुरूप आगे बढ़ाया जाएगा।

* इस योजना का मुख्य उद्देश्य भूजल स्तर में सुधार करना तथा जल उपभोग को अधिक युक्ति-युक्त बनाना है।

*इसका उद्देश्य सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण के सम्बंध में जागरूकता में वृद्धि करना भी है।

* जो ज़िले व पंचायत इसके सम्बंध में अच्छा कार्य करेंगे उन्हें अधिक फंड दिया जाएगा।

* इस योजना के तहत 6000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है इनमे से 50% विश्व बैंक के द्वारा ऋण दिया गया है जिसे केंद्र सरकार चुकाएगी।

इस योजना के प्रभाव-

• इससे भूजल स्तर का सही डेटाबेस तैयार करने में सहायता होगी।

• पंचायत स्तर पर जल उपभोग के सम्बंध में जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा।

•समुदाय के लिए जल सुरक्षा सुनिस्चित हो सकेगी

*जल संसाधनों का प्रभावी दोहन सुनिस्चित होगा इसके लिए सूक्ष्म सिंचाई , फसल विविधिकरण आदि का प्रयोग किया जाएगा।

* इससे किसानों की आय को दोगुना करने में सहायता होग़ी।

* यह योजना मुख्यतः भूजल स्तर में सुधार से सम्बंधित है अतः जब भूजल में सुधार होगा किसानों को सिंचाई में सुविधा होग़ी जिससे किसानी अधिक आसान हो सकेगी।

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सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कैसे करें ?


. सिविल सेवा परीक्षा की तयारी के लिए आपको एक परफेक्ट रणनीति की जरुरत होती है। सामान्यतः इस परीक्षा की तैयारी करने वाले को हम दो भागो में विभाजित कर सकते है
१- वे लोग जिन्हे लगभग दो या तीन साल बाद एग्जाम देना है
२- वे लोग जिन्हे नेक्स्ट ईयर ही एग्जाम देना है

दोनों प्रकार के लोगों के  लिए अलग अलग रणनीति  होती  है
 हम पहले उन लोगों कीबात करते है जिन्हे  तीन साल बाद एग्जाम देना है। ऐसे लोगों को सबसे पहले स्टैटिक पोरशन पर  काम करना चाहिए। इसमें निम्नलिखित विषय को शामिल किया जाता है –
१-इतिहास
२-भूगोल
३-संविधान
४-अर्थव्यवस्था
५-सामन्य विज्ञानं
यदि आप अपनी तैयारी आरम्भ कर रहे है तो सबसे पहले आपको इन विषय पर अच्छी पकड़ बनानी होगी। अब हम इन विषय पर विस्तार से बात करते है –

इतिहास 
               इस विषय पर आपको अच्छा  काम करना है क्योंकि यह pre  and main दोनों  के लिए महत्व  रखता है। लेकिन इसमें जो सवाल आते है उनमे अब राजनितिक इतिहास न के बराबर आता है means अब राजाओं से सवाल नहीं पूछे जाते  इस विषय मुख्यतः कला एवं संस्कृति से सवाल आतें है। इसके लिए आप पढ़ सकते है-
a- क्लास 6 से 12 तक की ncert
b-क्लास 11 and 12 की चित्रकला की बुक्स
c-विपिन चंद्र
d नितिन  सिंघानिया
e-रामशरण शर्मा

भूगोल –
इसका भी अच्छा महत्व है ,इस विषय को आप तीन भाग में विभाजित करके पढ़े
-विश्व का भूगोल
-भारत का भूगोल
-पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
इस विषय में आजकल जो प्रश्न आ रहे है उनमे पर्यावरण का अधिक भाग है। एक और जरुरी बात आपको भारत एवं विश्व के एटलस का बहुत डीप नॉलेज होना चाहिए। इसके लिए आप पढ़ सकते है –
a-क्लास 6 से 12 तक की ncert
b-ऑक्सफ़ोर्ड स्टूडेंट एटलस
c सविन्द्र सिंह
d माज़िद हुसैन

सविंधान एवं राजव्यवस्था —
वर्तमान समय में इस विषय को करंट अफेयर्स के साथ जोड़कर अधिक पूछा जा रहा है। ये काफी रुचिकर सब्जेक्ट है यदि इसे रटने के स्थान पर समझा जाए तो। इसके लिए पढ़ना चाहिए –
a-क्लास 6 से 12 तक की ncert
b -कानून प्रकाशन का बेयर एक्ट
c -एम लक्ष्मीकान्त

अर्थव्यवस्था —
इस विषय को सावधानी के साथ पढ़ना है यंहा आपको पूरा इकोनॉमिक्स पड़ने की जरुरत नहीं मेरे विचार से आपको निम्नलिखित टॉपिक की बेसिक नॉलेज होनी चाहिए –
A -राष्ट्रीय आय
b -गरीबी व् बेरोज़गारी
c -मौद्रिक नीति
d -राजकोषीय नीति
e -विदेश व्यापर नीति
f -सरकार की विभिन्न योजनाएं (इन सभी टॉपिक को आप अलग स्रोत से कवर करें)
इनके अलावा प्रत्येक वर्ष आने वाला आर्थिक सर्वेक्षण भी आपको अच्छे से समझना है।

सामान्य विज्ञानं —
इसके लिए आपको क्लास ६ to १० की ncert पढ़ना चाहिए।
वास्तव में वर्तमान समय में अधिकांश प्रश्न प्रौद्योगिकी से आ रहे है जैसे –
1 -रक्षा प्रौद्योगिकी
2 -स्पेस प्रौद्योगिकी
3 -नैनो प्रौद्योगिकी
4 -चिकित्सा प्रोद्योगिकी etc

एक बात हमेशा ध्यान रखिये यदि एग्जाम तीन साल बाद देना है तो करंट अफेयर्स को लेकर जरा भी पैनिक होने की जरुरत नहीं ,आप करंट अफ़ैयर्स तब पढ़े जब आपको एक साल बाद एग्जाम देना हो. आपका स्टैटिक भाग ऐसा हो की इससे फैक्ट या कॉसेप्ट जो पूछा जाए गलत न हो।

अब बात करते है उन लोगो की जिन्हे नेक्स्ट ईयर एग्जाम देना है ,तो आप ऊपर बताए गए स्टैटिक के साथ एक साल का करंट पढ़े। इसके लिए घंटो अखबार पढ़ने  की जरुरत नहीं आप कोई अच्छी मैगज़ीन व् दिल्ली की किसी अच्छी कोचिंग  की मासिक पत्रिका को फॉलो करे।

फ्रेंड्स मेने यंहा एग्जाम के चरणों के बारे में कुछ नहीं लिखा क्योंकि में समझता हु कि ये आप इसकी अच्छी जानकारी रखते है।