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DISCUSSION

Atal Bhujal Yojna-Will it Solve India’s Water Crisis?/ अटल भूजल योजना-क्या यह भारत के जल संकट को दूर कर सकेगी?

भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 95वें जन्म दिवस पर(25 दिसम्बर 2019) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अटल भूजल योजना को आरम्भ किया।

अटल भूजल योजना विश्व बैंक से भी वित्त पोषित होगी। यह एक केंद्रीय योजना । विश्व बैंक ने 2018 में ही इस योजना का अनुमोदन कर दिया था।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर भूजल स्तर में सुधार करना है।

भारत की स्तिथि

भारत में विश्व की कुल आबादी का क़रीब 16% लोग निवास करते है जबकि विश्व के पीने योग्य पानी का केवल 4% ही भारत में है।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सिंधु, कावेरी, कृष्णा, सुवर्णरेखा, पेन्नार, माही, साबरमती आदि नदियाँ जल की कमी से जूझ रही है अर्थात इनमे इनकी क्षमता से कम पानी रह गया है।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 2025 में भारत में प्रतिव्यक्ति जल उपलब्धता 1434 क्यूबिक मीटर होगी जो 2050 में कम होकर 1219 क्यूबिक मीटर रह जाएगी।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार यदि प्रतिव्यक्ति जल उपलब्धता 1700 क्यूबिक मीटर से कम होती है तो इसे जल तनाव ( Water stressed conditions) कहा जाता है जबकि यदि यह 1000 क्यूबिक मीटर से कम हो जाए तो इसे ज़ल अभाव( water scarcity conditions) कहा जाता है।

भारत की जनसंख्या तेज़ी से बढ़ रही ऐसे में पानी की आवश्यकता में भी तेज़ी से वृद्धि होगी।

भारत के 15 राज्यों में कुल भूजल का 90% हिस्सा है जैसे- उत्तर प्रदेश-16.2%, मध्य प्रदेश-8.4%, महाराष्ट्र-7.3%, बिहार-7.2%, पश्चिम बंगाल-6.8%, असम-6.6% आदि।

उत्तर भारत विशेषकर दिल्ली , हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कल संसाधनों का अत्यधिक दोहन हुआ है। यंहा के 60 % से अधिक जल संसाधन विकट स्तिथि में है।

अटल भूजल योजना—

* आरम्भ में यह योजना 7 राज्यों( गुजरात, हरियाणा,कर्नाटक,मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र,राजस्थान व उत्तर प्रदेश) में लागू किया जाएगा।

* इस योजना को 5 वर्ष (2020-21 से 2024-25) के लिए लागू किया जाएगा।

* इसके तहत 78 ज़िलो की 8350 ग्राम पंचायतों में जल संकट की समस्या का समाधान किया जाएगा व परिस्थिति के अनुरूप आगे बढ़ाया जाएगा।

* इस योजना का मुख्य उद्देश्य भूजल स्तर में सुधार करना तथा जल उपभोग को अधिक युक्ति-युक्त बनाना है।

*इसका उद्देश्य सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण के सम्बंध में जागरूकता में वृद्धि करना भी है।

* जो ज़िले व पंचायत इसके सम्बंध में अच्छा कार्य करेंगे उन्हें अधिक फंड दिया जाएगा।

* इस योजना के तहत 6000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है इनमे से 50% विश्व बैंक के द्वारा ऋण दिया गया है जिसे केंद्र सरकार चुकाएगी।

इस योजना के प्रभाव-

• इससे भूजल स्तर का सही डेटाबेस तैयार करने में सहायता होगी।

• पंचायत स्तर पर जल उपभोग के सम्बंध में जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा।

•समुदाय के लिए जल सुरक्षा सुनिस्चित हो सकेगी

*जल संसाधनों का प्रभावी दोहन सुनिस्चित होगा इसके लिए सूक्ष्म सिंचाई , फसल विविधिकरण आदि का प्रयोग किया जाएगा।

* इससे किसानों की आय को दोगुना करने में सहायता होग़ी।

* यह योजना मुख्यतः भूजल स्तर में सुधार से सम्बंधित है अतः जब भूजल में सुधार होगा किसानों को सिंचाई में सुविधा होग़ी जिससे किसानी अधिक आसान हो सकेगी।

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SCIENCE AND TECHNOLOGY

Hantavirus- Is it a New Global Pandemic?/ हंता वाइरस- क्या यह एक नई वैश्विक महामारी है?

By Rodents

विश्व के लगभग 200 देश अभी Corona वाइरस के प्रभाव से बाहर भी नही निकले कि चीन से ख़बर आती है कि 24 मार्च को चीन में एक व्यक्ति की हंता वाइरस से मृत्यु हो गई । इस ख़बर को भारतीय मीडिया में इस तरह प्रस्तुत किया गया मानो यह Corona की ही तरह दुनिया को प्रभावित करने वाला है।

हंता वाइरस को तकनीकी भाषा में इसे Orthohantavirus के नाम से भी जाना जाता है।

इस वाइरस का नाम दक्षिण कोरिया की हंतान नदी के नाम पर रखा गया था

यह वाइरस मुख्यतः मूषक/ चूहों(Rodents) के माध्यम से फैलता है ।यह चूहों के मल, मूत्र एवम् लार के सम्पर्क में आने से फैलता है।

सामान्यतः घर , फ़ैक्ट्री आदि की सफाई के दौरान इसके फैलने की सम्भावना अधिक रहती है यदि उन जगहों पर चूहों का वास रहा हो।

हंता वाइरस के लक्षण( Symptoms )— इस वाइरस के लक्षण 1 से 8 सप्ताह में सामने आते है।

आरम्भ में थकान, बुख़ार, मांसपेशियों में दर्द, सिर दर्द, सर्दी, उल्टी आदि जैसे लक्षण दिखाई देते है

कुछ समय बाद क़फ़ युक्त खांसी व साँस लेने में तकलीफ़ होती है कभी कभी रोगी की किडनी भी फैल हो जाती है।

USA के रोग नियंत्रण केंद्र के अनुसार इस वाइरस से प्रभावित लोगों में मृत्यु दर 40% तक है। सम्पूर्ण विश्व में प्रत्येक वर्ष लगभग 1.5 लाख लोग इससे प्रभावित होते है जिनमें से अधिकांश चीन से होते है।

इस वाइरस प्रभाव की पहचान करना अत्यधिक जटिल है क्योंकि आरम्भिक लक्षण सामान्य फ़्लू के जैसे होते है।यदि रोगी को साँस लेने में तकलीफ़ हो तो हंता वाइरस हो सकता है।

अभी तक इसकी वैक्सीन तैयार नही हो सकी है। यदि समय पर पहचान हो रोगी को बचाया जा सकता है। 40% मृत्यु दर उन मामलों में है जब रोगी आठ से दस सप्ताह बाद उपचार हेतु आता है।

इसे फैलने से कैसे रोका जाए?—

• Rodents के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सम्पर्क से बचना।

• यदि Rodents का प्रभाव है तो तो उनके मल-मूत्र की सही तरीक़े से सफाई हो।

• जँहा से Rodents के घुसने की सम्भावना हो उन मार्गों को बंद करना।

• खाना व पानी का सही भंडारण करना व कचरे का सही प्रबंध करना

• घरों व कार्यस्थल पर उन सभी वस्तुओं को हटाना जँहा मूषक/ चूहे अपना घर बनाते है।

Hantavirus

क्या इससे Panic होना चाहिये?— इसका उत्तर होगा नही क्योंकि-

॰ विशेषज्ञों का मानना है यह Covid-19 की तरह अनजाना वाइरस नही है

॰ यह एक संक्रामक रोग नही

॰ यह Covid-19 की तरह मानव से मानव में नही फैलता, यह केवल Rodents के मल मूत्र तथा लार के सम्पर्क से फैलता है।

॰ यह सही है कि इसकी वैक्सीन नही है पर डॉक्टर इसके उपचार का तरीक़ा जानते है।

आगे क्या?-

अभी हंता वाइरस के स्थान पर Covid-19 पर ध्यान देना चाहिए । लेकिन साथ ही यह भी ध्यान रखना होगा कि यदि हंता वाइरस महामारी बनता है तो हम कैसे निपटेंगे।

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ECONOMY

Corona,Unorganised Sector And The Government/ कोरोना, असंगठित क्षेत्र और सरकार।

Labour Distribution

एक अर्थव्यव्स्था में असंगठित क्षेत्र ऐसे क्षेत्र को कहा जाता है “जिसमें प्रत्येक आर्थिक क्रियाकलाप( उत्पादन,विपणन और विक्रय) में 10 से कम श्रमिक कार्य करते है और जो सामान्यतः निजी व्यक्ति या व्यक्ति के समूह के द्वारा संचालित होते है।”

आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के अनुसार भारत के कुल वर्क फ़ोर्स का 93% हिस्सा असंगठित क्षेत्र का है। देश में लगभग 45 करोड़ कार्य बल है जिसमें से 41.5 करोड़ लोग असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है।

नीति आयोग(2018) के अनुसार वर्क फ़ोर्स लगभग 85% हिस्सा असंगठित क्षेत्र से है।

यानी ये ऐसे लोग है जो ऐसे क्षेत्र में कार्यरत है जहां ना वेतन की सुरक्षा है और ना ही किसी प्रकार की भविष्य निधि का प्रावधान।

एक अनुमान के अनुसार असंगठित क्षेत्र में कार्यरत एक मज़दूर सामान्यतः महीने के चार से पाँच हज़ार रुपये कमाता है और यह भी तब जब वह किसी नगर अथवा क़स्बे में कार्य करे।असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लोगों की निम्नलिखित समस्याएँ होती है-

1. रोज़गार की अनिश्चिता- यह सबसे बड़ी समस्या है जब भी कारोबार प्रभावित होता है ऐसे लोगों को हटा दिया जाता है बिना किसी नोटिस के

2. पेंशन अथवा भविष्य निधि के सम्बंध में कोई विशेष व्यवस्था नही ।हालाँकि अटल पेंशन योजना के माध्यम से समाधान का प्रयास किया गया लेकिन यह व्यावहारिक रूप में सफल नही रहा क्योंकि लोगों में जागरूकता का अभाव है।

3. कार्यस्थल पर बड़ी चोट की स्थिति में भविष्य अंधकारमय हो जाता है।

4. बच्चों को उचित शिक्षा नही मिल पाती और ना ही परिवार को अच्छा आहार मिल पाता है।

5. नगरों अथवा क़स्बों में झुग्गियों में ऐसे श्रमिक निवास करते है , जँहा का माहोल एवम् सुविधाएँ अच्छा जीवन स्तर के लायक़ नही होती।

क़ोरोना का प्रभाव—-

क़ोरोना महामारी का सबसे बुरा प्रभाव इसी क्षेत्र पर पड़ा है।

क़ोरोना के कारण देश में एतिहासिक लॉक डाउन करना पड़ा। एसी स्थिति में इस क्षेत्र में कार्यरत लोग बड़ी संख्या में बेरोज़गार हो गए , हालाँकि सरकार ने कहा है कि इनका वेतन ना काटा जाए पर यह सर्वविदित है कि उन्हें वेतन नही मिलने वाला।

इस महामारी ने असंगठित क्षेत्र में दो बड़ी समस्याओं को जन्म दिया-

1.भूख– यह एक विकराल समस्या है। इस क्षेत्र में कार्यरत लोगों के पास अधिक संसाधन नही होते एसी स्थिति में ये लोग अधिक समय तक अपनी ज़रूरतें पुरी नही कर सकते।

2.पलायन- यह एक गम्भीर समस्या है जिसका समाधान अगले एक दो दिन में ही करना होगा। लॉक डाउन की घोषणा के कुछ दिन बाद ही बड़ी संख्या में लोगों ने अपने गृह राज्य की ओर पलायन आरम्भ कर दिया । दिल्ली, मुंबई, मैसूर, हैदराबाद आदि नगरों का घटनाक्रम इसका उदाहरण है। उत्तरप्रदेश के लगभग 40 लाख, बिहार के लगभग 36 लाख, राजस्थान के लगभग 18 लाख लोग अन्य राज्यों में कार्यरत है। ये लोग कुछ मात्रा में पलायन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से करेंगे ही।

सरकारें क्या करें-

1. सबसे पहले केंद्र सरकार राज्यों के लिए इस सम्बंध में दिशा निर्देश जारी करे ताकि एकीकृत व्यवस्था की जा सके

2. राज्य सरकारें तत्काल प्रभाव से एसे श्रमिकोंके लिए भोजन ,पानी व अस्थाई निवास की व्यवस्था करें केवल दावों से काम नही चलने वाला।

3.श्रमिक जिन राज्यों की ओर पलायन कर रहे है उन राज्यों की सरकारों को राज्य की सीमा पर अस्थाई कैम्प विकसित करें ताकि लॉक डाउन का उद्देश्य प्रभावित ना हो।

4. पलायन करने वाले लोगों को जागरुक किया जाए, वे अफ़वाहों पर ध्यान न दे। लोगों को समझाया जाए कि एसा करने से उनके साथ साथ उनके परिवार का जीवन भी ख़तरे में आ सकता है। इसके बाद भी लोग नही मानते है तो उनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही हो।

बाक़ी रही बात आर्थिक उपाय की तो वह वित्त मंत्रालय( भारत सरकार) पहले ही कार्य कर रहा है।

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EDUCATION

HISTORY BEHIND THE ORIGIN AND ABOLITION OF SATI SYSTEM IN INDIA/ भारत में सती प्रथा का आरम्भ एवं समाप्ति।

इस कुप्रथा का आरम्भ संभवतःगुप्तकाल के आसपास हुआ था। गुप्त शासक भानुगुप्त के एरण अभिलेख(510 ईस्वी) में इस प्रथा के बारे में उल्लेख मिलता है।इस प्रथा के तहत स्त्री अपने पति के शव के साथ स्वयं को भी जला लेती थी। इसके पर्याप्त साक्ष्य है कि इसके लिए समाज का दबाव होता था तथा सती होने वाली महिला को नशीला पदार्थ खिला दिया जाता था ताकि उसे कुछ पता ना चला। जब भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना हुई तब भी इस प्रथा का प्रचलन था।कम्पनी के प्रयास-

कम्पनी इस प्रथा को समाप्त करने के सम्बंध में बहुत अधिक सावधानी से कार्य कर रही थी क्योंकि इस समय कम्पनी को विद्रोह का डर था। १८ वीं सदी के अंत तक कलकत्ता सप्रीम कोर्ट ने भी इस प्रथा को समाप्त करने के प्रयास आरम्भ कर दिए थे।इसी समय श्रीरामपुर ,चिनसुरा,चंद्रनगर आदि स्थानों पर इस प्रथा को हतोत्साहित किया जाने लगा था। 1770 से 1780 के मध्य बम्बई प्रेज़िडेन्सी ने भी सी पर प्रतिबंध का प्रयास किया था।लेकिन कोई क़ानून नही बनाया जा सका ।
शाहबाद के कलेक्टर एम. एच. ब्रुक ने कार्नवालिस को लिखा था इस कुप्रथा को रोकने के लिए नियम बनाने की ज़रूरत है लेकिन गवर्नर जनरल हिचकिचा रहा था क्योंकि उसे विद्रोह का डर था।कार्नवालिस ने अपने लोगों को सलाह दी थी कि वे इस प्रथा को हतोत्साहित करे लेकिन बल प्रयोग ना करे।
1813 में मजिस्ट्रेटों तथा अन्य अधिकारियों को यह अधिकार दिया गया कि वे एक स्त्री को सती होने से उस दशा में रोक सकते है यदि सती होने के लिए बल प्रयोग किया गया हो या वह नाबालिग हो या गर्भवती हो।
1817 में यह नियम बनाया गया कि एसी स्त्री सती नही हो सकती जिसके नाबालिग संतान हो जिसकी देखभाल करने वाला कोई ना हो।लेकिन सरकार ने पूर्ण प्रतिबंध नही लगाया।

भारतीयों का योगदान-

उपर्युक्त परिस्थितियों में ही कुछ प्रगतिशील भारतीयों ने भी प्रयास आरम्भ किए।राजा राम मोहन राय इनमे अग्रणी थे।राम मोहन राय ने अपनी भाभी को सती होते हुए देखाथा।

राजा राम मोहन राय

राजा राम मोहन राय ने 1818 में सरकार को पत्र लिखकर बताया था कि यह प्रथा शास्त्रों के अनुसार आत्महत्या है ।इन्होंने संवाद कौमुदी नामक पत्रिका के माध्यम से सती प्रथा के विरुद्ध जनमत तैयार करने का प्रयास किया।
लेकिन इसी समय राधाकान्त देव के नेतृत्व में कुछ रूढ़िवादी नेताओ ने सती प्रथा के समर्थन में प्रचार आरम्भ किया इन्होंने चंद्रिका नामक पत्रिका के माध्यम से यह कार्य कियाथा।

विलियम बैंटिक का प्रयास-

इन्ही परिस्तिथियों में जुलाई 1828 में विलियम बैंटिक भारत आया , यह सुधारवादी विचारोंसे युक्त था।

विलियम बैंटिक

राधाकान्त देव ने चंद्रिका नामक पत्रिका के माध्यम से बैंटिक को बताया कि सती प्रथा एक आदरणीय प्रथा है सरकार इसे समाप्त ना करे लेकिन बैंटिक ने ध्यान नही दिया।
4 दिसम्बर 1829 को रेग्युलेशन 17th के माध्यम से सती प्रथा को बंगाल में दंडनीय अपराध घोषित कर दिया गया।1830 में इसे बम्बई व मद्रास में भी अपराध घोषित कर दिया गया।
लेकिन अभी तक यह ब्रिटिश भारत में ही लागू हुआ। धीरे धीरे देशी रियासतों ने भी अपराध घोषित किया जैसे अहमदनगर(1836),जूनागढ़(1838),सतारा(1846),पटियाला(1847) आदि।हालाँकि इसके बाद भी रूढिवादियों ने प्रयास जारी रखा इन्होंने जनवरी1830 में England की प्रिवी काउन्सिल में अपील की जिसे 1832 में ख़ारिज कर दिया गया ।
इस तरह सती प्रथा सैद्धांतिक रूप से समाप्त हो गई लेकिन व्यावहारिक रूप में इसका प्रचलन स्वतंत्रता के बाद भी जारी रहासितम्बर 1987 मै राजस्थान के सिकर ज़िले में रूप कंवर सती हुई थी।

रूप कंवर सती स्थल

रूप कंवर सती कैस भारत में सती प्रथा का अंतिम ज्ञात कैस माना जाता है।

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DISCUSSION

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कैसे करें ?


. सिविल सेवा परीक्षा की तयारी के लिए आपको एक परफेक्ट रणनीति की जरुरत होती है। सामान्यतः इस परीक्षा की तैयारी करने वाले को हम दो भागो में विभाजित कर सकते है
१- वे लोग जिन्हे लगभग दो या तीन साल बाद एग्जाम देना है
२- वे लोग जिन्हे नेक्स्ट ईयर ही एग्जाम देना है

दोनों प्रकार के लोगों के  लिए अलग अलग रणनीति  होती  है
 हम पहले उन लोगों कीबात करते है जिन्हे  तीन साल बाद एग्जाम देना है। ऐसे लोगों को सबसे पहले स्टैटिक पोरशन पर  काम करना चाहिए। इसमें निम्नलिखित विषय को शामिल किया जाता है –
१-इतिहास
२-भूगोल
३-संविधान
४-अर्थव्यवस्था
५-सामन्य विज्ञानं
यदि आप अपनी तैयारी आरम्भ कर रहे है तो सबसे पहले आपको इन विषय पर अच्छी पकड़ बनानी होगी। अब हम इन विषय पर विस्तार से बात करते है –

इतिहास 
               इस विषय पर आपको अच्छा  काम करना है क्योंकि यह pre  and main दोनों  के लिए महत्व  रखता है। लेकिन इसमें जो सवाल आते है उनमे अब राजनितिक इतिहास न के बराबर आता है means अब राजाओं से सवाल नहीं पूछे जाते  इस विषय मुख्यतः कला एवं संस्कृति से सवाल आतें है। इसके लिए आप पढ़ सकते है-
a- क्लास 6 से 12 तक की ncert
b-क्लास 11 and 12 की चित्रकला की बुक्स
c-विपिन चंद्र
d नितिन  सिंघानिया
e-रामशरण शर्मा

भूगोल –
इसका भी अच्छा महत्व है ,इस विषय को आप तीन भाग में विभाजित करके पढ़े
-विश्व का भूगोल
-भारत का भूगोल
-पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
इस विषय में आजकल जो प्रश्न आ रहे है उनमे पर्यावरण का अधिक भाग है। एक और जरुरी बात आपको भारत एवं विश्व के एटलस का बहुत डीप नॉलेज होना चाहिए। इसके लिए आप पढ़ सकते है –
a-क्लास 6 से 12 तक की ncert
b-ऑक्सफ़ोर्ड स्टूडेंट एटलस
c सविन्द्र सिंह
d माज़िद हुसैन

सविंधान एवं राजव्यवस्था —
वर्तमान समय में इस विषय को करंट अफेयर्स के साथ जोड़कर अधिक पूछा जा रहा है। ये काफी रुचिकर सब्जेक्ट है यदि इसे रटने के स्थान पर समझा जाए तो। इसके लिए पढ़ना चाहिए –
a-क्लास 6 से 12 तक की ncert
b -कानून प्रकाशन का बेयर एक्ट
c -एम लक्ष्मीकान्त

अर्थव्यवस्था —
इस विषय को सावधानी के साथ पढ़ना है यंहा आपको पूरा इकोनॉमिक्स पड़ने की जरुरत नहीं मेरे विचार से आपको निम्नलिखित टॉपिक की बेसिक नॉलेज होनी चाहिए –
A -राष्ट्रीय आय
b -गरीबी व् बेरोज़गारी
c -मौद्रिक नीति
d -राजकोषीय नीति
e -विदेश व्यापर नीति
f -सरकार की विभिन्न योजनाएं (इन सभी टॉपिक को आप अलग स्रोत से कवर करें)
इनके अलावा प्रत्येक वर्ष आने वाला आर्थिक सर्वेक्षण भी आपको अच्छे से समझना है।

सामान्य विज्ञानं —
इसके लिए आपको क्लास ६ to १० की ncert पढ़ना चाहिए।
वास्तव में वर्तमान समय में अधिकांश प्रश्न प्रौद्योगिकी से आ रहे है जैसे –
1 -रक्षा प्रौद्योगिकी
2 -स्पेस प्रौद्योगिकी
3 -नैनो प्रौद्योगिकी
4 -चिकित्सा प्रोद्योगिकी etc

एक बात हमेशा ध्यान रखिये यदि एग्जाम तीन साल बाद देना है तो करंट अफेयर्स को लेकर जरा भी पैनिक होने की जरुरत नहीं ,आप करंट अफ़ैयर्स तब पढ़े जब आपको एक साल बाद एग्जाम देना हो. आपका स्टैटिक भाग ऐसा हो की इससे फैक्ट या कॉसेप्ट जो पूछा जाए गलत न हो।

अब बात करते है उन लोगो की जिन्हे नेक्स्ट ईयर एग्जाम देना है ,तो आप ऊपर बताए गए स्टैटिक के साथ एक साल का करंट पढ़े। इसके लिए घंटो अखबार पढ़ने  की जरुरत नहीं आप कोई अच्छी मैगज़ीन व् दिल्ली की किसी अच्छी कोचिंग  की मासिक पत्रिका को फॉलो करे।

फ्रेंड्स मेने यंहा एग्जाम के चरणों के बारे में कुछ नहीं लिखा क्योंकि में समझता हु कि ये आप इसकी अच्छी जानकारी रखते है।

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ECONOMY

क्या केवल लॉकडाउन समाधान है??

२४ मार्च की आधी रात से भारत लॉकडाउन है , लोगों की आवाजाही पर नियंत्रण और यह ज़रूरी भी है क्योंकि इस महामारी को फ़ेलने से रोकने का यही एक तरीक़ा है। लेकिन क्या लॉकडाउन करने मात्र से यह समस्या हल हो जाएगी तो इसका उत्तर है नही । हमें इसके आगे भी कार्य करना होगा ।भारत में इसे खोज कर समाप्त करना होगा। अभी भी लोग जागरुक नही है वे अपने को घर के अंदर नही रख रहे विशेसकर छोटे क़स्बे और गाँव में।

एक बात और भी कि इस समय फसल की कटाई भी चल रही है एसे में किसान स्वयं को कैसे रोक पाएगा इसके बारे में भी सोचना होगा आज वित्त मंत्री ने अनेक घोषणाएँ की लेकिन फसल के नुक़सान को लेकर कोई बात नही थीं।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि लॉकडाउन की घोषणा के साथ ही बड़ी संख्या में मज़दूर घर की और पलायन कर रहे है यह पलायन भी भुखमरी तथा corona का फ़ेलाव दोनो कोबढ़ावा देगा। ये मज़दूर लम्बी दूरी तय करेंगे दिन के उजाले में या फिर अंधेरे में पर करेंगे ज़रूर , एसी स्थिति में इस बात की क्या गारंटी है corona का संक्रमण नही होगा?

एक और बात यह कि यदि ये लॉक डाउन आगे बढ़ा तों लोगों केसे रोक जाएगा क्योंकि बड़ी संख्या एसे लोगों की है जिनके लिए ये 21 दिन भी बहुत बड़ी मुसीबत बन गए है।

हमें इन सभी बातों पर काम करना होगा आगे के लिए भी तेयार रहना होगा एवम् corona को खोज कर समाप्त करना होगा